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Showing posts from December, 2024

कि-007 कोई नहीं किसी का

कोई नहीं किसी का, मतलबी बड़ा ये ज़माना है एक ना एक दिन  फिर तन्हाई को चले आना है, किसी को न समझ मुस्तक़िल दिल मे, "अजनबी" हर शख्स ने पुराने साल की तरह चले जाना है। -🆚"Ajnabi"

शे-021 एक बार को मैं तो

एक बार को मैं तो तुझे भूल भी जाऊं, पर तेरे हमनाम हमशक्ल भूलने नहीं देते। -🆚"Ajnbi"

शे-020 समझ नहीं आता

समझ नहीं आता मक्कारी की ज़रूरत क्या है जीने के लिए जब नेकदिली ही बहुत काफी है -🆚"Ajnabi"

कि-006 तुम्हे याद करना

तुम्हे याद करना भी ज़रूरी है, मगर क्या करूँ भूलना भी ज़रूरी है। तुम बिन ज़िंदगी हो गई है वीराँ, पर क्या करूँ इसे जीना भी ज़रूरी है। -🆚"Ajnabi"

शे-019 झूंट ही बिकता है

झूंट ही बिकता है, झूंट ही खरीदा जाता है, यहां तलबगार सच का, कहाँ मिल पाता है। -🆚"Ajnabi”

ग़-001 अब तो तू मुझसे

अब तो तू मुझसे खुश है ना ज़माने? कि अब मैं भी तो तेरे जैसा हो गया हूँ! बड़ी देर लगी मुझे बदल जाने में, मगर तूने जो चाहा, मैं वैसा हो गया हूँ। अब तो तू मुझे भी जीने देगा ना ज़माने? आखिर मैं भी तो सेल्फिश पूरा हो गया हूँ। विसर्जित कर दीं हैं तमाम भावनाएं मैने, अब मैं भी संगदिल तेरे जैसा हो गया हूँ। अबतो तू मुझे भी देगा सम्मान ना ज़माने? मैं भी अब निष्ठुर कठोर इंसाँ  हो गया हूँ। तेरे मेरे गुण एक से हो गए हैं ना ज़माने? मैं भी तो भरोसा तोड़ने वाला हो गया हूँ। -वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"

कि-005 अब तो तू मुझसे

अब तो तू मुझसे खुश है ना ज़माने? कि मैं भी तो अब तेरे जैसा हो गया हूँ! बड़ी देर लगी मुझे बदल जाने में, मगर तूने जो चाहा, मैं वैसा हो गया हूँ।

मु-008 और ज़्यादा तंग

और ज़्यादा तंग न कर ज़िन्दगी, इतना घमंड भी न कर ज़िन्दगी, हमने रोज़ तेरे जैसी हज़ारों को, यूंही दम तोड़ते देखा है ज़िन्दगी।       -🆚 "अजनबी"

कि-004 कहीं जज़्बात होते

कहीं जज़्बात होते ही नहीं, कहीं दरियाऐ-जज़्बात होते हैं। कहीं आंसू बहते ही नहीं, कहीं अश्कों के सैलाब होते हैं। -🆚 "अजनबी"

शे-018 एहसासात-ओ-जज़्बात

अहसासात-ओ-जज़्बात धरे के धरे रह जाते हैं मासूमियत के मुखोटे जब चेहरों से हट जाते हैं। -🆚

शे-017 बहुत लंबा समय

बहुत लंबा वक्त नहीं चाहिए लोगों को पहचानने के लिए, वक़्त आने पर वो खुद ही अपना परिचय दे देते हैं 

शे-016 कुछ लोग पराए

कुछ लोग पराए होकर भी पराए नहीं लगते, और कुछ अपने होकर भी अपने से नहीं लगते।

शे-015 इस गम को भी जमा कर

इस ग़म को भी जमा करदे अपने ग़मकदे में, 'अजनबी', ये भी एक दिन हार मानके ख़ुद ही ख़ामोश हो जाएगा। -🆚 "अजनबी"

शे-014 कितना चजोत से होता

कितना छोटा सा होता है ये दिमाग़, फिर भी, न जाने कितनी ग़लतफ़हमियां पाले रहता है। -🆚 "अजनबी"

शे-013 दर्द भरी दुनियां

दर्द भरी दुनियां में सभी पराए हो जाते हैं, बस एक दर्द ही है, जो पराया नहीं होता।. -🆚 "अजनबी"

शे-012 "अजनबी" दिल टूटा

"अजनबी" दिल अगर टूटा तो टूटा, इसमें ग़म नहीं किसी बात का, मगर टूटने की गूंज जाती क्यों नहीं, ग़म तो है बस इसी बात का। -🆚"अजनबी"

शे-011 हम लड़ लिए सबसे

"हम लड़ लिये सबसे,मगर हार गये ख़ुदसे।" वक़्त नहीं बीतता, ख़ुद बीत रहे हैं कबसे। 🆚

त्रि -001 अब तो फिक्र होने

अब तो फ़िक्र होने लगी है, एक रात गुज़री अकेले दूसरी भी गुजरने लगी है।

शे-010 न जाने कैसी लगी

न जाने कैसी लगी है नज़र दोस्ती को, दीदार को उसके, आंखें तरसने लगी हैं। -🆚 "Ajnabi"

शे-009 मिलना तो दूर

मिलना तो रहा दूर, तू कहीं दिखा भी नहीं, खैर छोड़, अब मिलने को कुछ रखा भी नहीं। -🆚 "Ajnabi"

शे-007 किसी खुशी के

किसी ख़ुशी के आने से भी अब डर लगने लगा है "अजनबी" कहीं उसमें लिपट कर मेरे लिए कोई नया दर्द न आया हो। -🆚 "Ajnabi"

मु-007 रुकी रुकी सही

रुकी-रुकी सही फिर भी सांस चल रही है, बुझी-बुझी सही फिर भी आस चल रही है, थमी-थमी हैं दिल की धड़कनें, "अजनबी" फिरभी ज़िंदगी जैसे अपने आप चल रही है। -🆚 "अजनबी"

शे-006 तमाम वफ़ाएँ धरी

तमाम वफ़ाऐं धरी की धरी रह जाती हैं, जब कोई 'अपना' बेवफ़ा निकल जाता है। -🆚"Ajnabi"

शे-005 कई बातों का

कई बातों का मतलब अलग निकल जाता है, जब बात वही,पर उसका टोन बदल जाता है। -🆚 "Ajnabi"

कि-003 लोगों के दिमाग ही

लोगों के दिमाग़ ही ख़राब हो जाते हैं, जब कुछ लोग ज़रा ख़ास हो जाते हैं, घमंड कभी किसी का टिकता नहीं है,  बड़े-बड़े दो मिनिट में ख़ाक हो जाते हैं। -🆚"Ajnabi"

शे-004 चुप रहके भी

चुप रहके भी राज़ राज़ नहीं रह जाता, चुप्पियां भी बहुत कुछ बोल जाती हैं। -🆚"Ajnabi"