मु-008 और ज़्यादा तंग

और ज़्यादा तंग न कर ज़िन्दगी,

इतना घमंड भी न कर ज़िन्दगी,

हमने रोज़ तेरे जैसी हज़ारों को,

यूंही दम तोड़ते देखा है ज़िन्दगी।

      -🆚 "अजनबी"

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