कि-004 कहीं जज़्बात होते

कहीं जज़्बात होते ही नहीं,

कहीं दरियाऐ-जज़्बात होते हैं।

कहीं आंसू बहते ही नहीं,

कहीं अश्कों के सैलाब होते हैं।

-🆚 "अजनबी"

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