मु-007 रुकी रुकी सही

रुकी-रुकी सही फिर भी सांस चल रही है,

बुझी-बुझी सही फिर भी आस चल रही है,

थमी-थमी हैं दिल की धड़कनें, "अजनबी"

फिरभी ज़िंदगी जैसे अपने आप चल रही है।

-🆚 "अजनबी"

Comments

Popular posts from this blog