शे-012 "अजनबी" दिल टूटा

"अजनबी" दिल अगर टूटा तो टूटा, इसमें ग़म नहीं किसी बात का,

मगर टूटने की गूंज जाती क्यों नहीं, ग़म तो है बस इसी बात का।

-🆚"अजनबी"

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