ग़-001 अब तो तू मुझसे
अब तो तू मुझसे खुश है ना ज़माने?
कि अब मैं भी तो तेरे जैसा हो गया हूँ!
कि अब मैं भी तो तेरे जैसा हो गया हूँ!
बड़ी देर लगी मुझे बदल जाने में,
मगर तूने जो चाहा, मैं वैसा हो गया हूँ।
अब तो तू मुझे भी जीने देगा ना ज़माने?
आखिर मैं भी तो सेल्फिश पूरा हो गया हूँ।
विसर्जित कर दीं हैं तमाम भावनाएं मैने,
अब मैं भी संगदिल तेरे जैसा हो गया हूँ।
अबतो तू मुझे भी देगा सम्मान ना ज़माने?
मैं भी अब निष्ठुर कठोर इंसाँ हो गया हूँ।
तेरे मेरे गुण एक से हो गए हैं ना ज़माने?
मैं भी तो भरोसा तोड़ने वाला हो गया हूँ।
-वीरेंद्र सिन्हा "अजनबी"
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