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Showing posts from August, 2025

शे-059 खुद ही पहुंचाई है

ख़ुद ही पहुंचाई है तकलीफ़ हमने दिल को, आख़िर क्यों देखा किसी को इतने करीब से। -वीरेंद्र "अजनवी"

मु-016 बड़ी ग़फ़लत

बड़ी ग़फ़लत में हैं लोग,  बड़े ही बे-ख़बर हैं लोग, आंखें मूंदे हैं कबूतर की भांति, ख़तरे को नहीं भांपते हैं लोग। -वीरेंद्र "अजनबी"

शे-058 मुस्कुरा के पिता हूँ

मुस्कुरा के पीता हूं, रोने वालों में से नहीं हूँ, होशवालों यह न समझना मैं दर्द में नहीं हूँ।  -वीरेंद्र "अजनबी"

शे-057 अपने ग़मों

अपने ग़मों को और न बढ़ा, ख़ुद ग़मों का वाइस बनकर, जैसा तू न था वैसा ना बन, किसी की ख़्वाहिश बनकर।  -वीरेंद्र "अजनबी"

कि-014 याद उसको ही

याद उसको ही करता रहा हूँ मैं, बेवफ़ा जिसको कहता रहा हूँ मैं, ये दिल उधर ही खिंचता गया है, जिधर जाने से रोकता रहा हूँ मैं। -वीरेंद्र "अजनबी"

शे-056 मासूम से दिखने वालों

मासूम से दिखने वालों, कभी मासूम रह भी लिया करो। हमेशा दर्द देते ही रहते हो, कभी तुम सह भी लिया करो।  -वीरेंद्र "अजनबी"

शे-055 ये रोशनी खुद ब खुद

ये रोशनी ख़ुद ब ख़ुद कहाँ से आ रही है  छन कर? कहीं तुम तो नहीं आ रहे मेरे अंधेरों में  रोशनी बन कर?  -वीरेंद्र "अजनबी"

शे-054 अब न बचा दुनियां

अब न बचा दुनियां में कुछ करना बाकी है, अब बस शमशान आबाद करना बाकी है। -वीरेंद्र "अजनबी"

शे-053 तुझसे मुलाक़ात की

तुझसे मुलाक़ात की हमे क्या ज़रूरत है, दिल मे जो है तस्वीर तेरी, वोही बहुत है।  -वीरेंद्र "अजनबी"

शे-052 इश्क़ और मोहब्बत

इश्क़ और मुहब्बत में  उस वक़्त बड़ी परेशानियां आती हैं, बेवफ़ाई में जब दौरे-मुहब्बत की निशानियां सताती हैं। -वीरेंद्र "अजनबी" 

पं-010 अच्छा इंसाँ खुद

अच्छा इंसान ख़ुद पर बीती हुई भुला देता है, पर घमंडियों को उचित सबक सिखा देता है। -वीरेंद्र "अजनबी"

शे-051 ऐ दिल नफरतों

ऐ दिल नफ़रतों के बीच से एक पल चुराने दे, गफ़लतों में ही सही, एक हँसीं पल बिताने दे। -वीरेंद्र "अजनबी"

शे-050 उसे क्या अंदाज़ा

उसे क्या अंदाज़ा तेरे दिल की गहराई का "अजनबी", उसने तो अभीतक बस समुंदर की गहराई ही देखी है। -वीरेंद्र "अजनबी"

पं-009 सफर में हमकदम

सफ़र में हमकदम हो न सके, हमसे आगे निकल गए आप। हम सिमट गए सलीकों में, दायरों से बाहर निकल गए आप। -वीरेंद्र "अजनबी"