शे-055 ये रोशनी खुद ब खुद


ये रोशनी ख़ुद ब ख़ुद कहाँ से आ रही है  छन कर?
कहीं तुम तो नहीं आ रहे मेरे अंधेरों में  रोशनी बन कर? 
-वीरेंद्र "अजनबी"

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