शे-057 अपने ग़मों


अपने ग़मों को और न बढ़ा, ख़ुद ग़मों का वाइस बनकर,
जैसा तू न था वैसा ना बन, किसी की ख़्वाहिश बनकर। 
-वीरेंद्र "अजनबी"

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