"शूलों" को शूल की तरह चुभ गए हम। बेकसूर होके भी सूली पर चढ़ गए हम। लो अब देखते रहना इसमे मुंह अपना, ऐसा आईना तुम्हारे वास्ते रख गए हम। -वीरेंद्र "अजनबी" 🆚
तेरे बगैर ये दुनियां हम कब की छोड़ देते, मगर, ये तेरे 'हमशक्ल' मरने भी नहीं देते। जगा देते हैं फिर वही जज़्बातो- ख़्यालात, तू नहीं है मेरी ज़िंदगी मे, मानने ही नहीं देते। -वीरेंद्र "अजनबी"