कि-010 मुझे ग़म तेरे

मुझे ग़म तेरे बदलने का नहीं,
एक जैसी रहती दुनिया नहीं,
ग़म तो रहा बस इस बात का,
तुझे बदलने में वक्त लगा नहीं।

-वीरेंद्र "अजनबी" (🆚)

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