कि-009 तेरे बगैर ये दुनियां

तेरे बगैर ये दुनियां हम कब की छोड़ देते,
मगर, ये तेरे 'हमशक्ल' मरने भी नहीं देते।
जगा देते हैं फिर वही जज़्बातो- ख़्यालात,
तू नहीं है मेरी ज़िंदगी मे, मानने ही नहीं देते।

-वीरेंद्र "अजनबी"

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