शे-028 अंदेशा तो था

अंदेशा तो था मुझे, मौसम के बदल जाने का,

पर इल्म न था मौका भी न मिलेगा संभल जाने का।

-वीरेंद्र "अजनबी" (🆚)

Comments

Popular posts from this blog