Posts

Showing posts from July, 2024

शे-002 मैं जब भी नकली

मैं  जब भी नकली हंसी हंसता हूँ तो पकड़ा जाता हूँ, उसे मेरे रंज-ओ-ग़म पता हैं, बेकार ही मैं छुपाता हूँ। -वीरेंद्र "अजनबी" शे-002

मु-006 बदलती रहती हैं

बदलती रहती हैं अपनों की वफ़ादारियाँ, क्या भरोसा अपनों का कब गैर हो जाएं। दोस्ती का भी अब रहा नहीं कोई ऐतबार, क्या पता आज है दोस्ती कल बैर हो जाए। -वीरेंद्र "अजनबी" मु-006

मु-005 मैं हिन्दू हिंसक नहीं

मैं हिन्दू हूँ, हिंसक नहीं हूँ मगर हिंसकों से घिरा हुआ हूँ, यूं तो बहुसंख्यक हूँ, परंतु अल्पसंख्यकों से डरा हुआ हूँ, कितने ही शीश कट गए मेरे पूर्वजों के इतिहास है गवाह, मैं फिर भी "वसुधैव कुटुम्बकम" पर आज भी इटका हुआ हूँ। -वीरेंद्र "अजनबी" मु-005 ©