शे-002 मैं जब भी नकली Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps July 15, 2024 मैं जब भी नकली हंसी हंसता हूँ तो पकड़ा जाता हूँ,उसे मेरे रंज-ओ-ग़म पता हैं, बेकार ही मैंछुपाता हूँ।-वीरेंद्र "अजनबी" शे-002 Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
पं-020 मालिक ने तो दिया January 10, 2026 मालिक ने तो दिया था इंसाँ को बस एक ही रंग, पर उसने बदलके दिखा दिए मुख़्तलिफ़ से कई रंग। -वीरेंद्र "अजनबी" Read more
शे-062 कहने को तो यहां September 08, 2025 कहने को तो यहां हर कोई एक दूसरे पर मरा करता है, हक़ीक़त में मगर हरेक अपना अपना ही देखा करता है। -वीरेंद्र "अजनबी" Read more
शे-063 तुम्हारी तरह अब मैं भी October 09, 2025 तुम्हारी तरह अब मैं भी भूल गया हूँ तुम्हे, मुझे भी अब बस तुम्हारी यादें ही पसंद हैं। -वीरेंद्र "अजनबी" Read more
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