शे-002 मैं जब भी नकली

मैं जब भी नकली हंसी हंसता हूँ तो पकड़ा जाता हूँ,
उसे मेरे रंज-ओ-ग़म पता हैं, बेकार ही मैं
छुपाता हूँ।

-वीरेंद्र "अजनबी" शे-002

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