मु-005 मैं हिन्दू हिंसक नहीं

मैं हिन्दू हूँ, हिंसक नहीं हूँ मगर हिंसकों से घिरा हुआ हूँ,
यूं तो बहुसंख्यक हूँ, परंतु अल्पसंख्यकों से डरा हुआ हूँ,
कितने ही शीश कट गए मेरे पूर्वजों के इतिहास है गवाह,
मैं फिर भी "वसुधैव कुटुम्बकम" पर आज भी इटका हुआ हूँ।
-वीरेंद्र "अजनबी" मु-005 ©

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