मु-006 बदलती रहती हैं

बदलती रहती हैं अपनों की वफ़ादारियाँ,
क्या भरोसा अपनों का कब गैर हो जाएं।
दोस्ती का भी अब रहा नहीं कोई ऐतबार,
क्या पता आज है दोस्ती कल बैर हो जाए।

-वीरेंद्र "अजनबी" मु-006

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