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Showing posts from January, 2026

शे-069 नज़र अंदाज़ी ही सही

नज़र अंदाज़ी ही सही, अब अगर हम पर आपकी नजरें इनायत नही, मंजूर होंगी आपकी नफ़रतें भी, गर दिल में आपके कोई मुहब्बत नहीं। -वीरेंद्र "अजनबी"

पं-023 बीते हुए दिनों में

  बीते हुए दिनों में कुछ न कुछ बात तो होगी, वरना इंसान को बीते वक़्त की याद आती क्यों। -वीरेंद्र "अजनबी"

पं-022 उसके लिए दर्द क्या और

उसके लिए दर्द क्या और खुशी  क्या, होंठ सिल दिए जा चुके हों जिसके।  -वीरेंद्र "अजनबी"

पं-021आज ज़िंदगी मे इंसान की

आज ज़िंदगी मे इंसाँन की, तकलीफें बहुत हैं, क्योंकि उसकी कीमत कम, आरजुएं बहुत हैं। -वीरेंद्र "अजनबी "

पं-020 मालिक ने तो दिया

मालिक ने तो दिया था इंसाँ को बस एक ही रंग, पर उसने बदलके दिखा दिए मुख़्तलिफ़ से कई रंग। -वीरेंद्र "अजनबी"

पं-019 जाने आज मुझे

जाने आज मुझे ये क्या हुआ है, "अजनबी", नसीब से बैर करके मैं ख़ुश होना चाह रहा हूं। -वीरेंद्र "अजनबी"