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Showing posts from December, 2025

पं-018 अपनों के दिये ज़ख्म

अपनों के दिये ज़ख्म भूलने की चीज़ नहीं, पर बेबस इंसाँ क्या करे, भुलाना पड़ता है। -वीरेंद्र °अजनबी"

पं-017 ज़िंदगी को खुश बनाने

ज़िंदगी को ख़ुश बनाने के लिए एक दोस्त ही काफ़ी है, दोस्ती से नफ़रत कराने को भी एक दोस्त ही काफ़ी है। -वीरेंद्र "अजनबी"