मु-022 कुदरत का दस्तूर है

कुदरत का यह दस्तूर है, घमंड कितना भी बड़ा हो,
 एक ना एक दिन टूटता ज़रूर है।
और जिस दिन घमंड ये टूटता है उस दिन,
अपने किये का पश्चाताप होता ज़रूर है।
-वीरेंद्र "अजनबी"

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