मु-021 अत्यंत संवेदनशील Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps November 19, 2025 अत्यंत संवेदनशील और भावुक रहता था,ज़माने को देखके क्या से क्या हो गया हूँ मैं।मैं भी क्यों रहूं कुछ अलग सा, "अजनबी",बस यही सोचके ढीठ और बेहया हो गया हूँ मैं।-वीरेंद्र "अजनबी" Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
पं-020 मालिक ने तो दिया January 10, 2026 मालिक ने तो दिया था इंसाँ को बस एक ही रंग, पर उसने बदलके दिखा दिए मुख़्तलिफ़ से कई रंग। -वीरेंद्र "अजनबी" Read more
शे-062 कहने को तो यहां September 08, 2025 कहने को तो यहां हर कोई एक दूसरे पर मरा करता है, हक़ीक़त में मगर हरेक अपना अपना ही देखा करता है। -वीरेंद्र "अजनबी" Read more
शे-063 तुम्हारी तरह अब मैं भी October 09, 2025 तुम्हारी तरह अब मैं भी भूल गया हूँ तुम्हे, मुझे भी अब बस तुम्हारी यादें ही पसंद हैं। -वीरेंद्र "अजनबी" Read more
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