मु-020 तुझी में दुनियां की
तुझी में दुनियां की हरेक
ख़ुशी देखता हूं,
तुझी में आसमाँ, तुझी में
ज़मीं देखता हूँ।
बहुत बेताब हो जाता हूँ
मैं तेरे लिए,
जो सब्र तुझमें है, वो ख़ुद में
नहीं देखता हूँ।
ख़ुशी देखता हूं,
तुझी में आसमाँ, तुझी में
ज़मीं देखता हूँ।
बहुत बेताब हो जाता हूँ
मैं तेरे लिए,
जो सब्र तुझमें है, वो ख़ुद में
नहीं देखता हूँ।
-वीरेंद्र "अजनबी"
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