कि-018 है अंदाज़ तेरा
हाय अंदाज़ तेरा ग़ज़ल सुनाने का,
दाएं-बांए देख के यूं मुस्कुराने का,
छोड़ सकते हैं हम हर मसरूफियात,
पर छोड़ेंगे ना मौका मुशायरे में आने का।
दाएं-बांए देख के यूं मुस्कुराने का,
छोड़ सकते हैं हम हर मसरूफियात,
पर छोड़ेंगे ना मौका मुशायरे में आने का।
-🆚"Ajnabi"
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