शे-064 ज़िंदगी से तेरी

ज़िंदगी से तेरी हम भी चले जाते हैं, "अजनबी",
आखिर चराग़ भी तो घर रौशन करके बुझ जाते हैं।
-वीरेंद्र "अजनबी"

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