मु-018 कोई उसकी नफरतों
कोई उसकी नफ़रतों का गिला क्या करे,
मुहब्बतों से जिसका कोई वास्ता रहा नहीं।
ख़ामोशियाँ ही बेहतर हैं अब तो उसकी,
जिसकी ज़ुबान का कोई भरोसा रहा नहीं।
मुहब्बतों से जिसका कोई वास्ता रहा नहीं।
ख़ामोशियाँ ही बेहतर हैं अब तो उसकी,
जिसकी ज़ुबान का कोई भरोसा रहा नहीं।
-वीरेंद्र "अजनबी"
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