कि-017 कौन संजोता है दिल मे
कौन संजोता है दिल में रिश्तों की लाश को,
उनको दफ़ना देने की ज़रा ज़हमत कीजिये।
कब हुए हैं मुर्दे ज़िंदा, ऐ "अजनबी",
रिश्तों को फ़रिश्तों का दर्जा मत दीजिए।
उनको दफ़ना देने की ज़रा ज़हमत कीजिये।
कब हुए हैं मुर्दे ज़िंदा, ऐ "अजनबी",
रिश्तों को फ़रिश्तों का दर्जा मत दीजिए।
-वीरेंद्र "अजनबी"
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