शे-060 चंद दिनों में ही

चंद दिनों में ही अपनी सी पे आगई  ज़िन्दगी अपनी,

मुकम्मल सी जो हमे लगने लगी थी  ज़िन्दगी अपनी। 

-वीरेंद्र "अजनबी"

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