शे-048 दग़ा बाज़ को

दग़ाबाज़ को भरोसेमंद बना नहीं सकते,  उससे गिला बेकार है।

सारे  जहां को दोस्त बना नहीं सकते, हरेक से उम्मीदे-वफ़ा बेकार है।


-वीरेंद्र "अजनबी" 🆚

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