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Showing posts from June, 2025

पं-007 तू तो महज़ ऐबक

तू तो महज़ एक तस्वीर है "अजनबी", जिसने जैसा चाहा तुझे वैसा बना दिया। -वीरेंद्र "अजनबी"

पं-005 कभी कभी

कभी कभी इंसाँ को इस कदर उकसा दिया जाता है, जो वो नहीं चाहता उससे वो करवा दिया जाता है। -वीरेंद्र "अजनबी"

शे-049 हर वक़्त ये न सोचो

हर वक़्त ये न देखो अपनी निगाह में क्या हो तुम, कभी येभी देखो दुनियां की निगाह में क्या हो तुम। -वीरेंद्र "अजनबी"

शे-048 दग़ा बाज़ को

दग़ाबाज़ को भरोसेमंद बना नहीं सकते,  उससे गिला बेकार है। सारे  जहां को दोस्त बना नहीं सकते, हरेक से उम्मीदे-वफ़ा बेकार है। -वीरेंद्र "अजनबी" 🆚

मु- 015 एक दिन तो होगा ही

एक दिन तो होगा ही घमंड चूर, तभी होगा पाला हुआ भरम दूर, मुग़ालते  पाल के चढ़े आसमान, पर ज़मीं पर आए सभी मग़रूर। -वीरेंद्र "अजनबी"