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Showing posts from April, 2025

शे-046 तुम तो दुश्मन

तुम तो दुश्मन से भी बदतर निकले, हम भी कहाँ तुम्हें दोस्त समझ बैठे। -"अजनबी" 🆚

शे-045 जिनके हिस्से में

जिनके हिस्से में ख़ुशियां नहीं होतीं,वो ख़ुशी से दर्द सह लिया करते हैं। वो ख़ुशियों का तस्सुवर करते हैं और हर हाल में ख़ुश रह लिया करते हैं। -वीरेंद्र "अजनबी" 🆚

पं-004 तन्हा ज़रूर हैं

तन्हा ज़रूर हैं हम मगर फालतू नहीं हैं हम करते हैं आपसे प्यार बेइंतहा, पर पालतू नहीं हम। -वीरेंद्र "अजनबी"

शे-044 काश के बेवफ़ा

काश के बेवफ़ा अपनी यादें भी समेट ले जाया करते, कम से कम वो हमारे ज़हन से निकल तो जाया करते। -वीरेंद्र "अजनबी" 🆚

मु-014 जब हम ख़ुदसे

जब हम ख़ुदसे गुफ्तगू किया करते हैं, ऐसे हालात को तन्हाई कहा करते हैं। किसी ख़ुशी की आरज़ू रही नहीं हमे, हम बस ग़मों में ही ख़ुश रहा करते हैं। -वीरेंद्र "अजनबी" 🆚

मु-013 जो बीत गए वो

जो बीत गए वो दिन कुछ और थे, तुम कुछ थे,हम भी  कुछ और थे। हालात बदल गए हैं  बड़ी तेज़ी से, आज  कुछ हैं,  कल कुछ और थे। -वीरेंद्र "अजनबी" 🆚