मु-011 कभी देखे ख्वाब

कभी देखे ख्वाब  पर टूट गए,
फिर देखे,  मगर फिर टूट गए,
यूंही चला सिलसिला ता-उम्र,
अब नींद उड़ गई, हम टूट गए।

-वीरेंद्र "अजनबी" 🆚

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