त्रि-003 उसे फितरतन दर्द
उसे फ़ितरतन दर्द देना ही था, फिर मैं क्या, और कोई क्या,
जो शिकार हो गया, वो कुछ नहीं, एक बदनसीब के सिवा
फिर उससे किसी को काहे का गिला काहे का शिकवा!!
जो शिकार हो गया, वो कुछ नहीं, एक बदनसीब के सिवा
फिर उससे किसी को काहे का गिला काहे का शिकवा!!
-वीरेंद्र "अजनबी" 🆚
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