मु-004 SARHAD के पार
SARHAD के उस पार छुपा रहता है कोई,
हदें पार करने से मुझे रोकता रहता है कोई,
हवाओं की, घटाओं की कहाँ होती है सरहद,
मुझपे ही क्यों अंकुश लगाता रहता है कोई।
हदें पार करने से मुझे रोकता रहता है कोई,
हवाओं की, घटाओं की कहाँ होती है सरहद,
मुझपे ही क्यों अंकुश लगाता रहता है कोई।
-वीरेंद्र "अजनबी" मु-004
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