मु-003 मैं कितना "अजनबी" हूँ

मैं कितना "अजनबी" हूँ,
ज़िंदगी भी मुझे पहचानती नहीं।
देता हूँ सबूत अपने होने का,
कोई सबूत मगर वो मानती नहीं।

-वीरेंद्र "अजनबी" मु-003

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