मु-002 आप शाख़ हैं Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps June 23, 2024 आप शाख़ हैं और पत्ते हम हैंकल सूख जाएंगे आज हरे हम हैं,शाख़ से जुदा होना नसीब हमारा,पतझड़ आते ही नीचे गिरते हम हैं।-वीरेंद्र "अजनबी" मु-002 Get link Facebook X Pinterest Email Other Apps Comments
पं-020 मालिक ने तो दिया January 10, 2026 मालिक ने तो दिया था इंसाँ को बस एक ही रंग, पर उसने बदलके दिखा दिए मुख़्तलिफ़ से कई रंग। -वीरेंद्र "अजनबी" Read more
शे-062 कहने को तो यहां September 08, 2025 कहने को तो यहां हर कोई एक दूसरे पर मरा करता है, हक़ीक़त में मगर हरेक अपना अपना ही देखा करता है। -वीरेंद्र "अजनबी" Read more
शे-063 तुम्हारी तरह अब मैं भी October 09, 2025 तुम्हारी तरह अब मैं भी भूल गया हूँ तुम्हे, मुझे भी अब बस तुम्हारी यादें ही पसंद हैं। -वीरेंद्र "अजनबी" Read more
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