मु-002 आप शाख़ हैं

आप शाख़ हैं और पत्ते हम हैं
कल सूख जाएंगे आज हरे हम हैं,
शाख़ से जुदा होना नसीब हमारा,
पतझड़ आते ही नीचे गिरते हम हैं।

-वीरेंद्र "अजनबी"  मु-002

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