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पं-024 भलाई की कीमत

भलाई की कीमत बहुत लंबे समय तक चुकानी पड़ती है, जल्दी ख़त्म नहीं होती सज़ा, अक्सर ज़िन्दगी गंवानी पड़ती है। -वीरेंद्र "अजनबी"

मु-023 कभी कभी इंसान

कभी कभी इंसान दो रूप रख लेते हैं, दोनों का वो बखूबी उपयोग कर लेते हैं,  किंतु तकलीफ़ तो उनको तब होती है, लोग जब दोनों रूपों को परख लेते हैं। -वीरेंद्र "अजनबी"

शे–070 ज़िंदगी मे घाटा

ज़िंदगी मे घाटा उठाना तो मुझे लाज़िम था, क्योंकि रिश्तों को मैंने कभी तौला ही नहीं। -वीरेंद्र "अजनबी"

शे-069 नज़र अंदाज़ी ही सही

नज़र अंदाज़ी ही सही, अब अगर हम पर आपकी नजरें इनायत नही, मंजूर होंगी आपकी नफ़रतें भी, गर दिल में आपके कोई मुहब्बत नहीं। -वीरेंद्र "अजनबी"

पं-023 बीते हुए दिनों में

  बीते हुए दिनों में कुछ न कुछ बात तो होगी, वरना इंसान को बीते वक़्त की याद आती क्यों। -वीरेंद्र "अजनबी"

पं-022 उसके लिए दर्द क्या और

उसके लिए दर्द क्या और खुशी  क्या, होंठ सिल दिए जा चुके हों जिसके।  -वीरेंद्र "अजनबी"