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Showing posts from February, 2026

पं-024 भलाई की कीमत

भलाई की कीमत बहुत लंबे समय तक चुकानी पड़ती है, जल्दी ख़त्म नहीं होती सज़ा, अक्सर ज़िन्दगी गंवानी पड़ती है। -वीरेंद्र "अजनबी"

मु-023 कभी कभी इंसान

कभी कभी इंसान दो रूप रख लेते हैं, दोनों का वो बखूबी उपयोग कर लेते हैं,  किंतु तकलीफ़ तो उनको तब होती है, लोग जब दोनों रूपों को परख लेते हैं। -वीरेंद्र "अजनबी"

शे–070 ज़िंदगी मे घाटा

ज़िंदगी मे घाटा उठाना तो मुझे लाज़िम था, क्योंकि रिश्तों को मैंने कभी तौला ही नहीं। -वीरेंद्र "अजनबी"