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Showing posts from September, 2025

शे-062 कहने को तो यहां

कहने को तो यहां हर कोई एक दूसरे पर मरा करता है, हक़ीक़त में मगर हरेक अपना अपना ही देखा करता है। -वीरेंद्र "अजनबी"

शे-061 कहने को तो

कहने को तो यहां हर कोई एक दूसरे पर मरा करता है, हक़ीक़त में मगर हरेक अपना अपना ही देखा करता है। -वीरेंद्र "अजनबी"

मु-017 जब कोई मुसीबत

जब कोई मुसीबत खुद पर ढह जाती है, आदर्शवादिता धरी की धरी रह जाती है। औरों में ऐब ही ऐब  नज़र आने लगते हैं, जब किसी की किसी से तबियत भर जाती है। -वीरेंद्र "अजनबी" 

शे-060 चंद दिनों में ही

चंद दिनों में ही अपनी सी पे आगई  ज़िन्दगी अपनी, मुकम्मल सी जो हमे लगने लगी थी  ज़िन्दगी अपनी।  -वीरेंद्र "अजनबी"