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कि- 002 तू ही मेरा आसमाँ

तू ही मेरा आसमाँ,  तू ही मेरी ज़मीं है, जिधर चल पड़े तू, मंज़िल मेरी वहीं है। ये वादियां, ये घटाएं मेरे किस काम की, हमसफ़र तू अगर मेरे साथ नहीं है। 🆚 "अजनबी"